नमस्कार दोस्तों। आज हम आपको बताएगें कि (Disadvantage of Demonetization) नोटबंदी से क्या क्या नुकसान हुए और लोगों को किन किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 8 नवम्बर 2016 को हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नोटबंदी की घोषणा की। इस निर्णय को कालेधन पर रोक, देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने व आंतकवाद पर रोक लगाने हेतु उठाया गया कदम बताया लेकिन ऐसा हुआ नही। नोटबंदी के अगले ही दिन BSE Sensex और NIFTY शेयर मार्किट सीधा ही 6% गिर गया। नोटबंदी के कारण देश भर मे नए नोटों की बड़ी भंयकर कमी हुई। देश की जनता कई कई घंटों नही बल्कि कई दिनों तक लाइन मे लगे रहे। लोगों को ऐसी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

अब देखते हैं कि नोटबंदी से क्या नुकसान हुए (Disadvantage Of Demonetization):-
- सरकार ने नोटबंदी को कालेधन के समाधान के रूप मे दिखाया था जबकि इससे कालेधन पर कुछ भी असर दिखा नही। सरकार को आशा थी कि लगभग तीन खरब रूपये ( 20% पुराने नोट) भारतीय अर्थव्यवस्था से हट जाएंगे और वो भी हमेशा के लिए। जबकि 30 दिस्मबर 2016 तक लगभग 15.4 खरब रूपयें मे से 14.47 खरब रूपये (पुराने नोटों के रूप मे) बैंकों मे जमा हो गये । यह सरकार की उम्मीद से कई गुणा ज्यादा रकम थी। अगस्त 2017 मे सैंट्रल बैंक ने एक रिपोर्ट मे बताया कि 99% पुराने नोट बैंकों मे जमा हो चुके थे। इस कारण नोटबंदी कालेधन पर रोक लगाने मे नाकाम रही।
- नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ा क्योंकि भारत मे खेती नकद भुगतान पर आश्रित रहती है। अधिकतर किसान खेती के लिए आवश्यक सामान (जैसे बीज, खाद व कीटानुनाशक आदि ) खरीद नही पाए क्योंकि बैंकों मे नये नोटों की बहुत कमी थी। मुद्रा (नकद) की कमी के चलते खाने की चीजों की बिक्री मे भी गिरावट आई जिससे फसलों के दाम और भी कम हो गए। जिस कारण किसान दिवालिए हो गए। उनकी कमाई इतनी भी नही थी कि वे ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी वहन कर पाते। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई और पर्दशन के रूप मे किसानों ने अपनी फसलों को सड़कों पर फेंक दिया।
- नोटबंदी से बेरोजगारी भी बढ़ी। नोटबंदी के कारण बहुत से मजदूर बेरोजगार हो गए। नोटबंदी के कारण लगभग 1.5 अरब लोग बेरोज़गार हुए।
- नोटबंदी होने से GDP मे भी गिरावट आई। 2016-17 वित्तीय वर्ष मे GDP विकास दर 0.5% से 3% गिर गई। जनवरी से मार्च 2017 मे GDP 6.1% थी जो वास्तव मे 7.1% होनी चाहिए थी। 2017 वित्तीय वर्ष मे GDP की विकास दर 8% की बजाए केवल 7.1% पर आ कर रूक गई। ये गिरावट वर्ष 2014 के मुकाबले अधिक थी।
- नोटबंदी के चलते ट्रांसपोर्ट बिलकुल रूक सा गया था। करीब 8 लाख ट्रक चालक इससे प्रभावित हुए और करीब करीब 4 लाख ट्रक हाईवे पर ही खड़े रह गए। टोल जंक्शन्स पर लम्बी लम्बी लाईनें लग गई। इसे रोकने के लिए ट्रांसपोर्ट मंत्री ने सभी नेशनल हाईवे टोल फ्री कर दिए और बाद मे इसे बढ़ाते हुए टोल 2 दिस्मबर तक फ्री कर दिए।
औद्योगिक क्षेत्र मे उत्पादन मे भी कमी आई। नवम्बर मे परचेजिंग मेनेजर इनडेक्स (पी एम आई) करीब 46.7% तक गिर गया जो अक्टूबर मे 54.5% था। औद्योगिक क्षेत्र मे 4.9% की गिरावट आई।
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