Effect of coronavirus in winter

वातावरण में वायरस हमेशा ही रहते हैं लेकिन ठंड के मौसम मे ये अधिक सक्रिय हो जाते हैं। जैसे सर्दियों मे जुकाम, खांसी, बुखार आदि जल्दी व बार बार होते हे। अगर परिवार मे एक सदस्य को हो तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी होने की संभावना अधिक रहती है।

श्वसन तंत्र संक्रमण संबन्धित बिमारियां(सांस की संक्रमणकारी बिमारियाँ- अस्थमा, न्यूमोनिया आदि) सर्दियों मे अधिक होती हैं। तथा इन शीत ऋतु जनित संक्रमणकारी बिमारियों का उपचार उपलब्ध होने के कारण न तो हम इनसे डरते हैं ओर न ही ये अधिकतर जानलेवा होती हैं। 

चूकिं कोरोना वायरस कोरोना परिवार का नया वायरस (कोविड-19) है जिसके बारे मे अभी तक कोई पुख्ता शोध नही हुए हैं और न ही विश्व के किसी भी देश मे कोई आंकड़े या कोई विश्लेषण हैं जिनके आधार पर कोविड-19 के बारे मे कोई टिप्पणी की जा सके।

उदाहरण के तौर  पर अगर अमेरिका मे कोरोना वायरस के व्यवहार को आधार समझा जाए तो पिछले वर्ष के दौरान सीजनल फ्लु की तुलना मे कोविड-19 के संक्रमण के कारण रेसपेरेटरी वायरल इंफेक्शन 40 गुणा अधिक हुआ तथा मृत्यु दर भी कई गुणा हुई । क्योंकि कोविड-19 की अभी तक कोई दवा इजाद नही हो पाई है। दुनिया भर के वैज्ञानिक दवा की खोज मे लगे हुए है। आशा है कि 2021 जुलाई माह तक दवा उपलब्ध हो सकेगी पर किन देशों को उपलब्ध हो सकेगी कितने लोगों तक पहुंच पाएगी इसका अनुमान लगाना अभी संभव नही। दवा को प्राप्त करने के लिए विश्व के देशों में होड़ लगी है साधन सम्पन्न देशों को पहले मिलेगी व कम साधन सम्पन्न देशों या गरीब देशों को तो बहुत बाद मे मिलेगी।

अगर यह महामारी शीत ऋतु में अधिक फैली जैसा की अंदेशा है तो भारत मे भी यह अनुमानित आंकड़ों को भी पार कर जाएगी, चिकित्सा व चिकित्सा सम्बन्धित अन्य सुविधाओं की बहुत कमी हो जाएगी। कोविड मरीजों के लिए अस्पताल भी कम पड़ेगें।

शीत ऋतु मे कोविड-19 के फैलने का एक कारण यह भी है कि वातावरण मे प्रदुषण अधिक होता है। बंद कमरों,  कार्यालयों, सिनेमाघरों, जिम व मॉलस आदि में लोगों का इकटठा होना। शीत ऋतु मे बहुत से त्यौहार आते हैं जिस कारण लोगों का आपसी नजदीकी संपर्क अधिक बनता है। त्यौहारों का मौसम भी कोविड़ -19 को फैलाने मे एक विशेष कारण हो सकता है। अब वैज्ञानिकों ने इस संक्रमण को वायु द्वारा फैलने वाला भी घोषित किया है। खांसने व छिंकने से पानी/ थुक की बुंदे मुहं से निकलती है उनमे से जो बुंदे थोड़ी भारी होती है वे तो तुरंत जमीन पर गिर जाती है और जो हल्की होती है वह हवा मे तैरती रहती जब तक किसी व्यक्ति द्वारा सांस के माध्यम से अन्दर खींच नही ली जाती। इस प्रकार यह वायरस फैलता है।

यह सिर्फ खांसने व छिंकने से ही नही फैलता बल्कि संक्रमित व्यक्ति द्वारा सांस लेने, खाते समय व सामान्य कार्य करते समय भी फैलता है चाहे संक्रमित व्यक्ति मे परोक्ष रूप से कोविड-19 के लक्षण न दिखाई देते हों लेकिन वह अन्य सामान्य लोगों मे तेजी से संक्रमण फैला सकता है। ऐसे कई उदाहरण पेश आएं है जहां केवल एक ही संक्रमित व्यक्ति ने हजारों लोगों मे संक्रमण फैला दिया।

संर्पक ट्रेसिंग को आधार रखते हुए जापान मे शोधकर्ताओं ने यह पाया कि बड़े बड़े आयोजनों मे बाहर खुले आसमान की तुलना मे एक छत के नीचे केवल एक संक्रमित व्यक्ति ने एक ही समय पर एक  ही स्थान पर 19 गुणा अधिक संक्रमण फैलाया। लेकिन इस बात से यह अर्थ न निकाला जाए कि खुले मे आयोजनों की छुट है। 

कम तापमान व आद्रता (नमी) का भी संक्रमण फैलाने मे बहुत अधिक योगदान रहता है। यह भी एक बड़ा कारण है की किसी भी तरह का श्वसन तंत्र संक्रमण शीत ऋतु मे अधिक खतरनाक साबित होता है।

भारत जैसे देश मे जहाँ सीमित संसाधन हैं व जनसंख्या विसफोटक है, वहाँ पर यह स्थिति अधिक भयावह हो सकती है लेकिन ऐसा भी नही है कि कुछ सामान्य व आसान उपायों द्वारा हम इस संक्रमण को हरा नही सकते है जिसके लिए हमें इन उपायों को प्रयोग मे लाना होगा ।

  1. प्रातः काल शरीर को सर्दी से बचाएं।
  2. सुबह की सैर को प्रदुषण की वजह से टाल दें या फिर सुर्य उदय के कुछ देर बाद जाएं। फेस मास्क का उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
  3. घर पर ही व्यायाम आदि  करे।
  4. बाहर जाने से पहले मुहँ को फेस मास्क से ढक लें।
  5. किसी भी व्यक्ति से हाथ न मिलाएं। दूर से ही नमस्कार करें।
  6. सामाजिक दूरी – 2 गज की दूरी का पालन करें।
  7. सबसे महत्वर्पूण बात साबुन व पानी से हाथ धोते रहें । बाहर होने पर / साबुन व पानी की सुविधा न होने पर/ उत्तम क्वालिटी के सेनेटाईजर का प्रयोग करें।
  8. जब तक बाहर रहें हाथों से आंख, नाक व मुहँ आदि को न छुएं।
  9. बाहर प्रयोग मे लाए गए जूते, चप्पलों आदि को घर के बाहर ही छोड़ें घर के भीतर न लाएं।
  10. बिना किसी आवश्यक कार्य के बाहर न जाएं। बच्चों / बुजुर्गों  आदि को बाहरी लोगों के संपर्क मे न आने दें। भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  11. खान पान पर विशेष ध्यान दें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाध्य प्रदार्थों का अधिक से अधिक प्रयोग करें।
  12. विटामिन ‘C’ का भरपूर सेवन करें। इसके लिए सब्जियों मे आंवला, नींबु, हरी मिर्च आदि का प्रयोग अधिक से अधिक करें। फलों मे विटामिन ‘C’ से भरपूर संतरा, मोसमी, अमरूद आदि का प्रयोग बहुत ही लाभकारी साबित होगा है।
  13. रात को दूध मे चुटकी भर हल्दी पाउडर डाल कर अवश्य पीयें।  

इन सब बातों को हमें अपनी दिनचर्या मे शामिल करना चाहिए जिससे की हम कोविड-19 के संक्रमण से बचे रहें।

कोविड-19 के संक्रमण को फैले बहुत समय हो गया है इसे सहजता से न ले। यह संक्रमण अभी भी उतना ही खतरनाक है जितना की लोकडाउन के समय था। भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार ने चरणबद्ध तरीके से लोकडाउन हटाया है इसका कतई भी यह अर्थ नही लगाया जाना चाहिए की कोविड-19 की संक्रामकता कम हो गई है।

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