गिलोय अद्वितिय प्राकृतिक औषधि है जिसको गुडिची, अमृता आदि नामों से पुकारा जाता है। (Giloy benefit) इसका उपयोग ज्वर (बुखार) को उतारने के लिए किया जाता है। ज्वरनाशक गुण होने के कारण इसका उपयोग डेंगु, स्वाइन फ्लु व मलेरिया आदि रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। वैज्ञानिक तौर पर यह स्थापित नही है। लेकिन आयुर्वैदिक व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति मे गिलोय के सत्त का प्रयोग इन जानलेवा बिमारियों में किया जाता है।
गिलोय कई जड़ी-बूटियों में से एक है, जो एडाप्टोजेन्स ( वो पदार्थ जो शरीर को अनुकूल बनाते हैं) की श्रेणी में आते हैं, ऐसे पदार्थ जो शरीर को विभिन्न प्रकार के तनाव के अनुकूल बनाने में मदद करते हैं। गिलोय का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक उपचार परंपराओं में किया जाता रहा है। गिलोय के रस का सेवन तनाव, चिंता, अवसाद को दूर करने व दिमाग की नसों को शांत करने और हारमोन्स को बढाने मे मदद करता है। गिलोय के पाउडर का इस्तेमाल प्रमुखता से तनाव व चिंता दूर करने वाली दवाओं मे किया जाता है। गिलोय मे प्रज्वलनरोधी या सूजनरोधी तत्व होने के कारण मस्तिषक के क्षतिग्रस्त तन्तुओं/ सेल की मरम्मत करने मे भी सहायक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कम मात्रा मे ग्रहण करने पर प्राक्रतिक तौर पर मधुमेह को संतुलित रखता है। खून में शक्कर की कमी को भी गिलोय ठीक करती है। इस तरह से गिलोय खून मे इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रण मे रखती है।
गिलोय का जूस पाचन तंत्र को उत्तम व पेट को साफ रखने मे मदद करता है तथा इसमे स्थित रेशे आंत से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते है। कब्ज़ मे भी राहत देती है। वास्तव मे प्रतिदिन गिलोय के रस का सेवन पाचन क्रिया को व्यवस्थित करने व पोषक तत्वों को अवशोषित करने मे सहायक होता है। अन्य जड़ी बुटी के साथ सेवन करने से ओर भी गुणकारी परिणाम सामने आते है।
बहुत से तरीके हैं काढ़ा बनाने के लेकिन गिलोक का साधारण काढ़ा असाधारण तरीके से बहुत सी व्याधियों की रोकथाम करता है। विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक ऐसी प्रसिद्ध जड़ी बुटी है जो आयुर्वैद मे स्वास्थ्य लाभ के लिए अति उत्तम है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने मे भी रामबाण औषधि का काम करती है। स्वास्थ रहने के लिये गिलोय का तुलसी के साथ नियमित सेवन भी लाभकारी है।
गिलोय का सेवन निम्न विधि द्वारा किया जा सकता है :–
सामग्री-
1 इंच अदरक का टुकड़ा
6-7 नीम की पत्तियाँ
7-8 तुलसी की पत्तियाँ
5 लोंग
6 काली मिर्च
2 छोटी गिलोय की टहनियाँ ( लगभग 5-6 इंच लम्बी)
गिलोय को छील लें व छोटे टुकड़े करें। सारी सामग्री को मिलाकर दरदरा कुट ले। दो गिलास पानी मे मिला कर आग पर आधा होने तक उबाले। छान कर पीयें।
नीम – गिलोय की प्रज्वलनरोधी या सूजनरोधी गुण को बढ़ा कर खून मे शक्कर की मात्रा को नियमित रखता है। मौसमी बुखार व जोड़ों के दर्द मे आराम पहुंचाता है।
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