
कोरोना वायरस का नाम नोवेल कोरोनो वायरस 19 इसलिए रखा गया क्योंकि यह साल 2019 मे फैला है और यह कोरोना परिवार का नया वायरस है अर्थात नया वायरस जिसके बारे मे अभी तक किसी को भी नही पता था। वायरस नया होने से नोवेल कहा गया और कोरोना फैमिली से होने पर CoV नाम हुआ। इस तरह इसे कोविड-19 कोरोना वायरस डिजिज़ 2019 कहा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यु एच ओ) ने इसे कोविड-19 नाम दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनोल्ड ट्रम्प द्वारा इसे बार बार चाइना वायरस कहा गया जिसकी निंदा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की तथा कहा कि कोविड-19 को किसी देश या नस्ल से जोड़ कर न देखा जाए।
क्योंकि कोविड-19 का संक्रमण एक ही साथ विश्व के बहुत सारे देशों मे हुआ इसलिए इसे वैश्विक महामारी घोषित किया गया।
मौसमी बिमारियों मे लोगों मे रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकसित होने के कारण वे उनका सामना बिना किसी तनाव व कठिनाई से कर लेते हैं। चूंकि यह बिमारी नई है इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता के अभाव व निपटने के लिए उपयुक्त दवाईयों का उपलब्ध न होने के कारण इस बिमारी के आगे मानव ने घुटने टेक दिए हैं। लेकिन अभी जंग जारी है बहुत से देशों ने कोविड-19 से लड़ने के लिए वैक्सीन की खोज शुरू कर दी है फिर भी वैक्सीन के पूर्ण रूप से मानव के इस्तेमाल मे आने मे अभी समय लगेगा। जब तक विश्व भर के लोगों को इस बीमारी से जूझने के लिए विशेषज्ञों की राय पर ही चलना होगा। भारत भी इस वैक्सीन को विकसित करने व प्रयोगशालाओं मे इसे बनाने की प्रकिया मे अग्रसर है।
कोविड -19 का संक्रमण जानवरों से या मानव से मानव मे फैलता है। निर्जीव वस्तुओं द्वारा नही फैलता। फेस मास्क संक्रमण को रोकने का सरल, सस्ता व महत्वपूर्ण तरीका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई है की फेस मास्क ही कोविड-19 के संक्रमण का सरल, सस्ता व महत्वपूर्ण उपाय है। ‘ न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिकल ‘ संस्थान की एक रिपोर्ट मे भी यह दावा किया गया है कि फेस मास्क रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। कोविड-19 के संक्रमण के शुरूआत से भारत सरकार ने भी फेस मास्क के इस्तेमाल को अनिवार्य किया है तथा इसका उलंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

कोविड-19 के संक्रमण से बचने के उपाय
- फेस मास्क का उपयोग। सर्वप्रथम फेस मास्क केवल कोरोना फैलाने वाले खांसी या छिंक द्वारा बाहर फैंके गए ड्रापलेटस से ही नही बचाता ब्लकि धूल व मिट्टी जैसे अन्य संक्रमणकारी तत्वों को भी छान कर हवा साफ करता है जिसके कारण फेफड़ों को शुद्ध व साफ हवा मिलती है। साथ ही साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
2. दुसरा उपाय बार बार हाथ धोना। सेनिटाईज़र का प्रयोग करना। यदि सेनिटाईजर उपलब्ध नही तो साधारण साबुन व पानी का प्रयोग हाथ धोने के लिए करना चाहिए।
3. तीसरा उपाय कि दो गज की दूरी बनाए रखना जिससे संक्रमण से बचा जा सकता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के आयुर्वैदिक व होम्योपैथिक रोग प्रतिरोधक दवाओं का प्रयोग करना या परंपरागत/घरेलु नुस्के अपनाना जो आसानी से उपलब्ध हों। इसी आधार पर ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भरसक प्रयत्न करने चाहिए।