सदाबहार का पौधा एक हमेशा खिलने वाला पौधा है अर्थात जिसमे बारह मास फूल खिले रहते है। सदाबहार ने आधुनिक पद्धति मे तथा परम्परागत हर्बल पद्धति मे अपना स्थान बनाया हुआ है। इसे अंग्रेजी मे पेरिविंकल, बंगला मे नयनतारा, मलयालम मे उषामल्लारी तथा हिन्दी मे सदापुष्पा कहते है। सदाबहार के स्वास्थ्य सम्बंधित व्यापक फायदे हैं (Benefits Of Sadabahar Plant)। यह शरीर की व्याधियों के उपचार के काम आती है जैसे मधुमेह, गले तथा फेफड़ों से सम्बंधित व्याधि, त्वचा संक्रमण, आंखों की जलन इन सबसे अलग केंसर से बचाने मे भी सहायक है।
सदाबहार के पौधे की ऊंचाई 1 से2.5 मीटर के लगभग होती है । यह सदा हरा भरा रहता है। यद्यपि सदाबहार पौधा मडागॉस्कर मूल का पौधा है लेकिन यह सारे संसार मे देखा जाता है। इसके फूल दो रंगों के होते है, एक गहरे गुलाबी-बैंगनी व दुसरा दुधिया सफेद।
सदाबहार के पौधे मे कुछ ऐसे मूल तत्व पाये जाते हैं जोकि कई गंभीर बिमारियों के उपचार मे सहायक होते हैं। जैसे उच्च रक्तचाप, हृदय आघात तथा कई प्रकार के टयुमर आदि।
आयुर्वेद अनुसार सदाबहार का स्वाद कड़वा तथा प्रभाव शुष्क व गर्म होता है। यह कफ को हरने वाला तथा घाव को भरने वाला है। मधुमेह को नियंत्रित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सदाबहार का सत्व इंसुलिन बनाने मे भी सहायक है।
मधुमेह मे सदाबहार (Benefits in Diabetes)

सदाबहार की पत्तियों को सूखा कर कांच के जार मे रख लें। जूस या पानी के साथ ऱोज सुबह खाली पेट लेने से मधुमेह नियंत्रित रहता है।
दिन मे 3 से 4 सदाबहार पौधे की पत्तियाँ चबाने से रक्तचाप मे अचानक होने वाले उतार चढ़ाव को रोकता है
सुबह खाली पेट सदाबहार के फूलों को उबालकर पीने से भी मधुमेह मे लाभकारी है।
श्वास सम्बन्धित व्याधियाँ (Benefits in Breathing Problem)

हर प्रकार के श्वसन की व्याधियों मे भी असरकारक है। इसके फूल मे मौजूद सक्रिय तत्व अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, स्रर्दी व जुकाम आदि को ठीक करते हैं। सांस नलिका में जमा बलगम को साफ कर गले की खराश को ठीक करते हैं।
सदाबहार के फूल व पत्तियों का रस हलके से मध्यम रक्त चाप के उपचार मे सहायक है तथा उच्च रक्तचाप को होने से पहले ही उसकी रोकथाम मे उपयोगी है।
सदाबहार एक आसान, घरेलु व शक्तिशाली परंपरागत उपाय है जो दिमाग की कार्यप्रणाली को और अधिक क्रियाशील करती है। याद्दाश्त को बढ़ाती है, एकाग्रता, ध्यान व सतर्कता का निरंतर विकास करती है।
बढ़ती आयु के साथ होने वाली याददाश्त मे कमी को दूर करती है । दिमाग के ऊतकों मे रक्त संचार उचित रखने मे सहायक है तथा दिमागी तनाव से छुटकारा दिलाती है।
सदाबहार के फूल व पत्तियाँ ऐसे उपयोगी तत्वों से भरपूर हैं जो त्त्वचा संबंधित बिमारियों जैसे सूर्य की किरणों से झुलसी त्वचा, झुर्रियां व बढ़ती आयु के कारण होने वाले बदलावों को ठीक रखती है। त्वचा के विभिन्न संक्रमणों का उपचार करने मे उपयोगी है। मुँहासे व पिम्पल्स को कम करने मे सहायक है। त्वचा को भी निखारता है।
उपयोग – सदाबहार की पत्तियों व नीम की पत्तियों को पीस कर हल्दी व गुलाब जल के साथ मिलाकर महीन पेस्ट बना ले। चहरे पर सूखने तक लगा कर रखे। पानी से धो लें। हर दुसरे दिन इसका प्रयोग करें।
यधपि सदाबहार के अनेक लाभ है (Benefits Of Sadabahar Plant) फिर भी उपयोग से पहले विशेषज्ञों का परामर्श अवश्य लें। अत्यधिक प्रयोग से निम्न रक्तचाप व कब्ज आदि की शिकायत हो सकती है।